INTACH & WTI Host International Roundtable on Cultural and Ecological Heritage Conservation
- मानव-हाथी संघर्ष के समाधान की दिशा में पहल, देहरादून में जुटे विशेषज्ञ
देहरादून। सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत के संरक्षण को नई दिशा देने के उद्देश्य से Indian National Trust for Art and Cultural Heritage (इन्टैक) ने Wildlife Trust of India के सहयोग से दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र और रोहिणी नीलेकानी फिलैंथ्रोपीज़ की साझेदारी में एक अंतरराष्ट्रीय संस्कृति-प्रकृति गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य सीमा पार सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत का मानचित्रण कर मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व को मजबूत बनाना है।
इस परियोजना के तहत देशभर में इन्टैक की विभिन्न शाखाओं के माध्यम से मौखिक परंपराओं, अनुष्ठानों और स्वदेशी वन प्रथाओं जैसी अमूर्त विरासत को दस्तावेजीकृत किया जा रहा है। यह पहल विशेष रूप से मानव-हाथी संबंधों को समझने और एशियाई हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए पारिस्थितिक गलियारों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। उत्तराखंड की सह-संयोजक अंजली भारथारी ने बताया कि सामुदायिक भागीदारी इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत है, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद करेगी।

सम्मेलन की अध्यक्षता मेजर जनरल आनंद सिंह रावत (सेवानिवृत्त) ने की। विशेषज्ञों ने “पवित्र भूदृश्य, साझा भविष्य” जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए हाथियों के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित किया। World Wide Fund for Nature के विशेषज्ञों ने हाथियों की आवाजाही, पारिस्थितिक गलियारों और कनेक्टिविटी योजना में सांस्कृतिक मानचित्रण को शामिल करने की आवश्यकता बताई।
पर्यावरणविदों ने शिवालिक हाथी अभ्यारण्य पर बढ़ते विकास दबाव और खतरों को भी उजागर किया। वहीं, उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारियों ने संरक्षित क्षेत्रों के भीतर और बाहर किए जा रहे प्रयासों और चुनौतियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के बीच संवादात्मक चर्चा भी हुई, जिसमें राजाजी टाइगर रिजर्व से जुड़े अनुभवों को साझा किया गया। संयोजकों ने बताया कि इस पहल के तहत आगामी दिनों में दून विश्वविद्यालय और स्कूली छात्रों के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे युवाओं को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जा सके। इस दौरान कई प्रकृति प्रेमी, वन्यजीव प्रेमी, पर्यावरण विद,वैज्ञानिक, वरिष्ठ वन अधिकारी समीर सिन्हा,इन्टैक से अंजलि भरतरी व दून पुस्तकालय के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी आदि उपस्थित रहे।
