- काली नदी में प्रदूषण का खतरा! अवैध कूड़ा जलाने के खिलाफ शिकायत, कार्रवाई की मांग तेज
- कूड़ा सीधे ढलान के जरिए काली नदी में पहुंच रहा
- खुले में कूड़ा जलाने उत्पन्न हो सकता है पर्यावरणीय संकट
नदीम परवेज@ धारचूला, रा.वि.। सीमांत क्षेत्र धारचूला में पर्यावरण को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। नगर पालिका परिषद पर अवैध रूप से कूड़ा डंपिंग और खुले में कूड़ा जलाने के आरोप लगे हैं, जिसके खिलाफ अब मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंच गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता केशर सिंह धामी ने इस संबंध में NGT में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि ग्राम पंचायत राथीं के प्रवेश द्वार के पास नगर पालिका द्वारा कूड़ा डंप किया जा रहा है और उसे खुले में जलाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो गया है।
शिकायत के अनुसार, कूड़ा सीधे ढलान के जरिए काली नदी में पहुंच रहा है, जिससे जल प्रदूषण के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। यह न केवल स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि नदी पारिस्थितिकी पर भी गहरा असर डाल रहा है।
धामी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने NGT से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और अविलंब कूड़ा डंपिंग व जलाने की प्रक्रिया रोकी जाए। साथ ही, वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से कचरा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
धारचूला जैसे संवेदनशील और सीमांत क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही न केवल पर्यावरण बल्कि जनजीवन के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। अब निगाहें NGT और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
