- तख्तापलट के बाद बैतड़ी में कड़ा मुकाबला, विकास मुद्दों पर टिकी निगाहें
नेपाल की जूलाघाट सीमा से वरिष्ठ पत्रकार राजेश पंगरिया की रिपोर्ट
झूलाघाट। हाल ही में ‘जेन जी’ आंदोलन और उसके बाद हुए राजनीतिक तख्तापलट के घटनाक्रम से गुजरे नेपाल में एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया तेज हो गई है। 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा की 165 प्रत्यक्ष और 110 समानुपातिक सीटों के लिए मतदान होना है। पश्चिमांचल के नौ जिलों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है, खासकर भारतीय सीमा से सटे बैतड़ी जिले में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
बैतड़ी में प्रतिनिधि सभा की एक सीट के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। प्रमुख दावेदारों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के हरिमोहन भंडारी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के पूर्व उद्योग मंत्री दामोदर भंडारी, नेपाली कांग्रेस के चतुर बहादुर चंद और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के भूपेंद्र चंद शामिल हैं। वहीं समानुपातिक सीट पर भी प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला है।
तख्तापलट के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है, जिसे राजनीतिक स्थिरता की कसौटी माना जा रहा है। चुनाव प्रचार में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे स्थानीय मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं। झूलाघाट सीमा से सटे जूलाघाट कस्बे के मतदाताओं का कहना है कि इस बार वे केवल वादों नहीं, बल्कि ठोस विकास कार्यों के आधार पर मतदान करेंगे। खासकर एमाले द्वारा क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
बैतड़ी निर्वाचन कार्यालय प्रमुख खगेंद्र भारती के अनुसार मतदान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सुरक्षा के मद्देनजर सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
राजनीतिक उथल-पुथल के बाद यह चुनाव नेपाल के लोकतंत्र के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है। अब नजर 5 मार्च पर है, जब बैतड़ी सहित पूरे देश की जनता अपने नए प्रतिनिधियों का चयन करेगी और देश की सियासी दिशा तय करेगी।
