Uttarakhand HC Warns Govt Over Delay in Lokayukta Appointment
- सालों से लंबित लोकायुक्त नियुक्ति पर सख्त हाईकोर्ट, उत्तराखंड सरकार को अल्टीमेटम
नैनीताल/देहरादून ।उत्तराखण्ड में लंबे समय से लंबित लोकायुक्त की नियुक्ति का मुद्दा अब गंभीर संवैधानिक सवाल बनता जा रहा है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हल्द्वानी के गौलापार निवासी शंकर जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। 18 मार्च को हुई सुनवाई के आदेश की प्रति गुरुवार को जारी की गई।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि लोकायुक्त जैसी महत्वपूर्ण संस्था की नियुक्ति में लगातार देरी न केवल कानून के अनुपालन में लापरवाही दर्शाती है, बल्कि शासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर लोकायुक्त कार्यालय पर लगातार खर्च किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नियुक्ति प्रक्रिया अब तक अधूरी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि इससे पहले भी कई बार राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया, लेकिन हर बार सरकार की ओर से सिर्फ समय ही मांगा गया। अदालत ने विशेष रूप से 25 जून 2025 के उस शपथ पत्र का उल्लेख किया, जिसमें सरकार ने दावा किया था कि लोकायुक्त नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
ताजा सुनवाई में भी राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे अदालत ने अंतिम अवसर मानते हुए स्वीकार किया। हाईकोर्ट ने अब सरकार को दो सप्ताह के भीतर पूरी प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गई है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। यदि तब तक सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे पाती है, तो अदालत और कड़ा रुख अपना सकती है।
लोकायुक्त की नियुक्ति में हो रही इस लगातार देरी ने प्रदेश में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की प्रतिबद्धता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और जनहित का बड़ा विषय बन गया है।
