Portals of Fourth Kedar Rudranath Temple Opened Amid Vedic Rituals and Chants of Har Har Mahadev
- हर-हर महादेव और जय श्री रुद्रनाथ के जयघोषों के बीच खुले श्री रुद्रनाथ के कपाट
- शंख, घंटियों की गूंजती ध्वनि और वैदिक मंत्रों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से किया सराबोर
गोपेश्वर@ Rashtriy Vichar#Uttarakhand#।
हर-हर महादेव और जय श्री रुद्रनाथ के गगनभेदी जयघोषों के बीच हिमालय की पुण्य वादियों में सोमवार को विश्व प्रसिद्ध चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोल दिए गए। अपराह्न 12:29 बजे पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठानों एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कपाटोद्घाटन की पावन प्रक्रिया संपन्न हुई। इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में शिवभक्त, साधु-संत एवं स्थानीय श्रद्धालु रुद्रनाथ धाम पहुंचे थे।
कपाटोद्घाटन की प्रक्रिया रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी पंडित हरीश भट्ट द्वारा संपन्न कराई गई। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा हिमालय क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयघोषों से भक्तिमय हो उठा। वातावरण में गूंजते शंख, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
उत्तराखण्ड के पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में विशेष महत्व रखने वाले श्री रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के एकानन स्वरूप अर्थात मुखमंडल की पूजा-अर्चना की जाती है। हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित यह धाम अपनी अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्य रहस्यात्मकता के कारण विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मान्यता है कि भगवान शिव के मुख स्वरूप के दर्शन केवल श्री रुद्रनाथ धाम में ही होते हैं। रुद्रनाथ के पुजारी पंडित हरीश भट्ट के अनुसार भगवान भोलेनाथ के एकानन मुखमंडल के दर्शन रुद्रनाथ में, चतुरानन स्वरूप के दर्शन नेपाल के पशुपतिनाथ में तथा पंचानन स्वरूप के दर्शन इंडोनेशिया में होते हैं।
रुद्रनाथ के पुजारी पंडित हरीश भट्ट ने बताया कि कपाट खुलने के साथ ही आगामी छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव के दुर्लभ एकानन स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
कठिन तप और साधना के समान मानी जाती है रुद्रनाथ यात्रा
लगभग 22 किलोमीटर लंबी उच्च हिमालयी पैदल यात्रा को पंचकेदारों की सबसे कठिन यात्राओं में माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 11 हजार 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्री रुद्रनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को दुर्गम पर्वतीय मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। यह यात्रा केवल शारीरिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक आस्था और धैर्य की भी परीक्षा मानी जाती है। कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की पवित्र रुद्रनाथ यात्रा का भी शुभारंभ हो गया।
रंग बिरंगे विभिन्न फूलों से सजा रुद्रनाथ धाम
कपाटोद्घाटन के शुभ अवसर पर श्री रुद्रनाथ गुफा मंदिर एवं संपूर्ण मंदिर परिसर को हजारों रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। हिमालय की गोद में सजा यह दिव्य धाम श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आकर्षण का केंद्र बना रहा।
इस प्रकार संपन्न हुई कपाटोद्घाटन की प्रक्रिया
- सोमवार प्रातः 8 बजे श्री रुद्रनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली हिमालयी मार्ग से मंदिर परिसर पहुंची।
- डोली के पहुंचते ही हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान रुद्रनाथ का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।
- अपराह्न 12:29 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
- कपाट खुलने के बाद पुजारी पंडित हरीश भट्ट मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किए।
- शीतकाल में समाधिस्थ स्वरूप में भगवान रुद्रनाथ पर अर्पित दिव्य वस्त्र एवं हिमालयी पुष्प-पादपों को विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ हटाया गया।
- तत्पश्चात स्वर्ग द्वारी, नारद कुंड एवं सरस्वती कुंड के पवित्र जल से भगवान रुद्रनाथ का अभिषेक एवं स्नान कराया गया।
- स्नान एवं पूजन के बाद भगवान का दिव्य रुद्राभिषेक संपन्न हुआ तथा वैदिक ऋचाओं के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई।
- सोमवार सायंकाल भगवान रुद्रनाथ की प्रथम आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
नई पीढ़ी में दिखा रुद्रनाथ यात्रा को लेकर विशेष उत्साह
रुद्रनाथ यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शिवभक्तों द्वारा भंडारों का आयोजन किया गया। इस बार विशेष रूप से नई पीढ़ी यानी जेन-जी युवाओं में रुद्रनाथ यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु कठिन हिमालयी यात्रा कर बाबा रुद्रनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे।
यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में जुटी चमोली पुलिस
चमोली पुलिस द्वारा रुद्रनाथ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग एवं प्रमुख पड़ावों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्रस्तुति: रमेश चंद्र थपलियाल।
